श्री गणेश चालीसा और आरती: Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi
भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है। भक्त बुधवार, गणेश चतुर्थी और अन्य शुभ अवसरों पर श्री गणेश चालीसा का पाठ तथा गणेश जी की आरती करते हैं।
इस लेख में पढ़ें श्री गणेश चालीसा का संपूर्ण हिंदी पाठ, प्रसिद्ध जय गणेश जय गणेश देवा आरती, और घर पर पूजा करने की सरल विधि।
श्री गणेश चालीसा पाठ करने का महत्व
श्री गणेश चालीसा भगवान गणेश की स्तुति में रचित भक्तिपाठ है। इसमें गणेश जी के स्वरूप, उनके जन्म की कथा, बुद्धि और विवेक से जुड़े प्रसंगों तथा उनकी महिमा का वर्णन मिलता है।
भक्त इसे श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पढ़ते हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार सुबह, शाम या पूजा के समय इसका पाठ कर सकते हैं।
श्री गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi)
॥ दोहा ॥
जय गणपति सद्गुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
जय गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।
गौरी ललन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चँवर सुधारे।
मूषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुचि पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुँच्यो तुम धरि द्विज रूपा॥
अतिथि जानि कै गौरी सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कहि अन्तर्ध्यान रूप ह्वै।
पालना पर बालक स्वरूप ह्वै॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन सुख मंगल गावहिं।
नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनिजन सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो।
उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥
कहत लगे शनि मन सकुचाई।
का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक सिर उड़ि गयो आकाशा॥
गिरिजा गिरीं विकल ह्वै धरणी।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।
काटी चक्र सो गज सिर लायो॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन भरमि भुलाई।
रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहस मुख सके न गाई॥
मैं मति हीन मलीन दुखारी।
करहुँ कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग ककरा दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीन पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
॥ दोहा ॥
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥
नोट: गणेश चालीसा के कुछ प्रचलित पाठों में शब्दों और पंक्तियों के छोटे अंतर मिलते हैं। पाठ करते समय अपनी पुस्तक या पारिवारिक परंपरा के पाठ का अनुसरण कर सकते हैं।
श्री गणेश जी की आरती: जय गणेश जय गणेश देवा
श्री गणेश चालीसा के पाठ के बाद भक्त प्रायः गणेश जी की आरती करते हैं। नीचे लोकप्रिय हिंदी आरती का प्रचलित पाठ दिया गया है।
॥ श्री गणेश आरती ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
आरती के शब्दों में क्षेत्र और परंपरा के अनुसार कुछ भिन्नताएँ मिल सकती हैं।
गणेश चालीसा और आरती करने की सरल विधि
पूजा स्थान को स्वच्छ करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
दीपक जलाएँ और अपनी परंपरा के अनुसार फूल या अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश का स्मरण करें।
श्री गणेश चालीसा का पाठ करें।
जय गणेश जय गणेश देवा आरती गाएँ और दीपक से आरती करें।
अंत में प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
पूजा की सामग्री और विधि परिवार, क्षेत्र तथा परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार पूजा करें।
बुधवार और गणेश चतुर्थी पर गणेश पूजा
बुधवार को कई भक्त भगवान गणेश की विशेष पूजा करते हैं। गणेश चतुर्थी भी गणेश जी की आराधना का प्रमुख पर्व है। इन अवसरों पर चालीसा, मंत्र और आरती का पाठ किया जाता है।
आप चाहें तो प्रतिदिन कुछ समय निकालकर गणेश जी का स्मरण और चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. गणेश चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
गणेश चालीसा का पाठ सुबह, शाम, बुधवार, गणेश चतुर्थी या किसी शुभ कार्य से पहले किया जा सकता है। अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार समय चुनें।
2. गणेश चालीसा के बाद कौन-सी आरती करनी चाहिए?
श्री गणेश चालीसा के बाद लोकप्रिय जय गणेश जय गणेश देवा आरती गाई जा सकती है।
3. गणेश चालीसा पढ़ने में कितना समय लगता है?
पाठ की गति के अनुसार सामान्यतः लगभग 5–10 मिनट लग सकते हैं।
4. क्या गणेश चालीसा का पाठ रोज कर सकते हैं?
हाँ, भक्त अपनी श्रद्धा और दिनचर्या के अनुसार इसका नियमित पाठ कर सकते हैं।
5. गणेश चालीसा किस भाषा में है?
गणेश चालीसा का प्रचलित पाठ हिंदी की अवधी-प्रभावित काव्य भाषा में मिलता है और इसे सामान्यतः देवनागरी लिपि में पढ़ा जाता है।
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माँ लक्ष्मी की पूजा और आराधना से जुड़े पाठ के लिए हमारा अगला लेख भी पढ़ें:
श्री लक्ष्मी चालीसा और आरती
निष्कर्ष
श्री गणेश चालीसा और जय गणेश देवा आरती भगवान गणेश की भक्ति के लोकप्रिय माध्यम हैं। भक्त इन्हें श्रद्धा, एकाग्रता और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पढ़ते हैं। आप इस पृष्ठ को पूजा के समय पाठ करने के लिए सहेज सकते हैं।
गणपति बप्पा मोरया!




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